‘इस्लामिक आतंकवाद’ कहने पर ट्रंप पर भड़के एर्दोगान, पूछा क्या म्यांमार के बोद्धों को आतंकी कहने की हिम्मत है?

नई दिल्ली – तुर्की के राष्ट्रपति रजब तय्यब एर्दोग़ान ने पश्चिमी देशों और मीडिया द्वारा प्रयोग किए गए ‘इस्लामी आतंकवाद’ शब्द की कड़ी निंदा की है। तुर्की के राष्ट्रपति ने कहा कि मुसलमान दूसरी सभ्यताओं, संस्कृतियों और मज्हब के लिये कोई प्रयोगशाला नही है। रजब तैय्यब एर्दोगान ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर भी निशाना साधा।
राष्ट्रपति एर्दोगान ने कहा कि अमेरेकी राष्ट्रपति ने ‘इस्लामिक आतंक’ शब्द का प्रयोग किया है, जिसकी तुर्की बार-बार निंदा करता हं। उन्होंने कहा कि क्या यह पश्चिमी देशो के नेता म्यांमार के बौद्धिस्टों के लिये बौद्ध आतंकवाद के शब्द के प्रयोग करने की हिम्मत रखते हैं, जिन्होंने रोहिंग्या मुसलमानों का जनसंहार किया और कर रहे हैं।
तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोगान ने कहा कि आज इस्लाम आतंकवाद, पिछड़ेपन और आंतरिक रूप से धार्मिक और राजनीतिक संघर्षों से पीड़ित है, और इसके लिए हमें एक पल के लिए भी शांति से नहीं बैठना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभ्यता ही एकमात्र ताकत है जो पूरी दुनिया में इंसानियत की हिफाजत कर सकती है।
इब्नेहलदुन यूनिवर्सिटी मे एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैय्यब एर्दोगान ने कहा कि अपने आप को अंग्रेजी तक सीमित न रखें, उन्होंने कहा कि हालांकि अंग्रेजी में बहुत सारी जानकारी हैं, लेकिन दुनिया का सबसे बड़ा ज्ञान दूसरी भाषाओं में है, तुर्की के राष्ट्रपति ने कहा कि आपको चीनी, फ्रेंच या रूसी जैसी दूसरी भाषा भी सीखना चाहिए।
बताते चलें कि इसी कार्यक्र में रजब तैय्यब एर्दोगान ने संयुक्त राष्ट्र के पांस स्थायी सदस्यों पर भी निशाना साधा था और कहा था कि दुनिया के पांच देश हमारे भविष्य का फैसला नहीं कर सकते। रजब तैय्यब एर्दोगान ने म्यांमार में हुए रोहिंग्या मुसलमानों के जनसंहार पर भी संयुक्त राष्ट्र की आलोचना की थी।

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